रिश्ते
आज कल रिश्ते सिर्फ नाम के रिश्ते बन कर रह गएँ हैं | रिश्तों की अहमियत दिन पर दिन ख़तम होती जा रही है | लोग रिश्तो का भाव लगाने लगे हैं , वह रिश्तों को पैसों से अछे अछे और मेहेंगे उपहारों से तोलते हैं | उनके नजर में रिश्तें का मतलब सिर्फ लेना हो गया है | जबकि रिश्ते न देने न लेने का नाम है | कोई भी रिश्ता तभी तक सलामत है जब तक उसमे व्यापर न हो जैसे दिल क बदले दिल, प्यार क बदले प्यार, या कहिये प्यार क बदले रुपये, क्यूँ की रिश्तों का कोई मोल नहीं लगा सकता चाहे वह माँ बेटे का हो, भाई भाई का, भाई बहिन का, पति पत्नी का, या कोई भी हो किसी भी रिश्ते मैं सर्त नहीं होनी चाहिए | सर्तों की वजह से अधिकतर समय रिश्तों में दरार पढ़ जाती है | रिश्तों को बनाना और निभाना बहुत ही मुस्किल काम है, कोई अगर इसे निभा पाता है तोह उसका जीवन सफल हो जाता है |
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